वो चिप कहां बनती थी जिससे पेट्रोल पंप वाले ग्राहक को धोखा देते थे?
अगर दो हजार रुपए का पेट्रोल आपने भराया तो आपकी गाड़ी में सिर्फ 1800 रुपए का पेट्रोल ही जाता था, दो सौ रुपए का पेट्रोल मशीन में लगी चिप बचा लेती थी।
अगर दो हजार रुपए का पेट्रोल आपने भराया तो आपकी गाड़ी में सिर्फ 1800 रुपए का पेट्रोल ही जाता था, दो सौ रुपए का पेट्रोल मशीन में लगी चिप बचा लेती थी।
उत्तर प्रदेश पुलिस की एसटीएफ लखनऊ में 100 पेट्रोल पंप पर छापे मारे। ज्यादातर पेट्रोल पंप पर एक चिप मिली, इस चिप के जरिए पेट्रोल पंप मालिक पेट्रोल चुराते हैं। मतलब मशीन दिखाती है कि आपने जितने का पेट्रोल भराया, उतना पेट्रोल आपकी गाड़ी में गया। लेकिन ये सीक्रेट चिप मशीन की रीडिंग को धोखा देती है और पेट्रोल चुरा लेती है। कुछ ऐसे समझिए, अगर दो हजार रुपए का पेट्रोल आपने भराया तो आपकी गाड़ी में सिर्फ 1800 रुपए का पेट्रोल ही जाता था, दो सौ रुपए का पेट्रोल मशीन में लगी चिप बचा लेती थी।
उत्तर प्रदेश की एसटीएफ ने जब तहकीकात की तो पता चला कि ये चिप महराष्ट्र के दो शहर में बन रहे थे। ठाणे और पुणे से तेल चोरी में इस्तेमाल होने वाले चिप बनाने वालों को पकड़ा गया है। ठाणे में चिप बनाया जाता था और पुणे में चिप ऑपरेट करने के लिए उसका रिमोट तैयार होता था। इसे तैयार करने वाले दो लोग पकड़े गए हैं, विवेक शेटे और अविनाश नाइक ने ये चिप और रिमोट कंट्रोल उत्तर प्रदेश के पेट्रोल पंप तक पहुंचाए। ठाणे में अपने वर्कशॉप पर विवेक चिप बनवाता था, चीन से चिप बनाने वाला सामान आता था। पेट्रोल पंप का मालिक जितना पेट्रोल चोरी करना चाहे उस हिसाब से चिप तैयार हो जाती थी। चिप चलाने के लिए रिमोट पुणे में अविनाश तैयार करता था। विवेक के पास से 100 चिप मिले हैं और अविनाश के पास 174 रिमोट बरामद हुए हैं।



